Sunday, September 27, 2020

कोरोना की आयुर्वेद औषधियों का सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही ले

 कोरोना की आयुर्वेद औषधियों का सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद करे । Self Medication से आपको तकलीफ हो सकती है :

              कोरोना इन्फ़ैकशन को फैले हुए करीब करीब 8-9 महीने अब भारत मे होने आए है । COVID:19 इन्फ़ैकशन की वजह से पूरा विश्व एकजूट होकर लड़ रहा है । कई जगह कुछ कुछ काबू मे आया हुआ कोरोना , बहोत सारी जगह पर बेकाबू भी बन गया है । आयदिन नए नए हॉट स्पॉट बन रहे हैं । social media मे अब RIP सुनने पर दिल एक धड़कन चूक जाता है की अब किसके अपमृत्यु का समाचार सुनना पड़ेगा । चारो और एक डर का माहोल बन गया है । एक छुपे हुए डर के नीचे हरकोइ जी रहा है । साथ ही जीवन निर्वाह चलाने के लिए, अपने काम को लेकर लोग बाहर भी निकल रहे हैं । कुछ लोग बेखौफ होकर घूम रहे है तो कुछ लोग डर के मारे घर का आँगन भी नहीं देखते है ।

Covid19


              आयुर्वेद के द्वारा covid19 संक्रामण किस तरह काबू मे आ सके उसके लिए बहोत सारे उपाय शुरू से विशेषज्ञों ने बताए हैं । आयुष डिपार्टमेंट द्वारा भी यह चिकित्सा के निर्देशों का किस तरह पालन किया जाए उसके लिए मार्गदर्शिका भी जारी की गई है । आयुर्वेद से रोगप्रतिकरक शक्ति बढ़ाने पर कोरोना से बचा जा सकता है यह बात सामने आने पर के साथ ही social media से लेकर print media तक सब जगह आयुर्वेद के अलग अलग चिकित्सा और नुसख़ों का ज़ोर शोर से प्रचार हुआ है । इन दिनों मे आयुर्वेद के प्रति लोगों की श्रद्धा ओर ज्यादा प्रबल हुई है । बतौर आयुर्वेद चिकित्सक मैंने यह महसूस किया की ज्यादा से ज्यादा लोग आयुर्वेद के विभिन्न नुस्खे और चिकित्सा इन दिनों मे अपनाने लगे है ।  

              लेकिन डर एक ऐसी बात है जो हमे कोई भी हद तक जाने के लिए मजबूर कर देती है । और उसमे भी किसी virus से संक्रमित होकर उससे अप्राकृतिक मृत्यु पाना या अपने किसी नजदीकी स्वजन को गंवाना इस बात से भयावह और डरावना और क्या हो सकता है ? यही डर की वजह से लोगो ने आयुर्वेद के विभिन्न उपचारों को घर पर अपनाना शुरू कर दिया । अपनाने तक तो अच्छा ही था, लेकिन एक हद से ज्यादा ही उसका प्रयोग आजकल हो रहा है यह मालूम पड रहा है । social media पर तो हर कोई जैसे आयुर्वेद का डॉक्टर बन कर बैठा है । सभी लोग कही सुने – पढे हुए भिन्न भिन्न आयुर्वेद नुस्खों को फॉरवर्ड कराते हुए इनबॉक्स को भर दे रहे है ।

Ayurveda Medicine


              लोग कहेते-मानते है की आयुर्वेद दवाइया खाने से उनकी side effects नहीं होती है । मैंने मेरे Facebook Page पर और हमारी वैबसाइट पर और न जाने कितनी ही जगह पर यह बात की होगी की साइड इफैक्ट का आधार दवाइयोंको आप कैसे ले रहे हो इस पर रहेता है । आयुर्वेद की औषधियों का भी साइड इफैक्ट होता है अगर वो उसकी योगी मात्रा से ज्यादा या कम ली जाए या किसी qualified डॉक्टर से परामर्शके  बगैर ली जाए ।

              COVID19 के चलते लोक डाउन लगा और उसके बाद unlock के new normal के वातावरण मे एक नयी दिनचर्या लोगोने अपनाई । अब कोरोना के इन्फ़ैकशन से बचने के लिए लोगो ने ज्यादा से ज्यादा नुस्खो और उपचारों को अपनाना चालू किया ।

Ayush Kwath


              रोगप्रतीकारक शक्ति को बढ़ाने की मानो एक दौड़ ही शुरू हुई है । हल्दी, कालीमिर्च , तुलसी जैसी गर्म चिज़े इन्फ़ैकशन को काबू मे लाकर सर्दी कफ आदि को काबू मे कर सकती है ऐसा मार्गदर्शिका मे कहा गया था । इसके लिए लोग रसोई घर मे ही मिलने वाले काली मिर्च, अदरक – शुंठ चूर्ण, तुलसी आदि को लेने लगे हैं  । इसके चलते सभी गरम-तेज मसलों को उबालकर या खाने मे लेने के अलग अलग नुस्खे प्रचलित हो गए । लोगो ने यह एकदम ही गर्म गुणवाले औषधोंका सेवन खुद की प्रकृति समजे बिना ही चालू कर दिया । दिन मे दो – तीन बार यह गरम चीज़ें हररोज – महीनों तक बेहिसाब लेते रहेने से एसिडिटि , कोलयटिस , पेट का दर्द , सिरदर्द, उल्टी होना, बालों का जड़ना, त्वचा विकार जैसी कई सारी समस्या अब सामने आने लगी हैं । सौंठ के पाउडर को सूंघना और उसको मुंह मे रखकर खाने के नुस्खे से कई लोगों को चक्कर आना, सिरदर्द होना आदि दिक्कते भी होने लगी हैं । ज्यादा गरम चीजों के सेवन से कई महिलाओ को मासिकधर्म से जुड़ी समस्या ज्यादा बढ़ गई हुई भी हमारी OPD मे दिखाई दे रही है । हल्दी ने तो मानो सारे रिकॉर्ड ही ब्रेक कर दिये है । सारे साल मे हम जितनी हल्दी नई खाते हैं उससे चार  – पाँच गुनी ज्यादा हल्दी हम इन चंद महीनों मे खा गए हैं । और अभी भी उसकी डिमांड बरकरार है । थोड़े ही दिनों मे हल्दी का कालाबाज़ार न हो तो ही गरिमत है ।

Turmeric Milk


              हल्दी हो या तुलसी हो या सोंठ हो या और कोई वनस्पति तब ही औषधीय गुण देगी जब उसे कोई आयुर्वेद के जानकार qualified doctor द्वारा कही जाए ।  जब वो कोई डिग्रीधरक आयुर्वेदिक वैद्य द्वारा निर्देश की जाए तो उसके पीछे का logic सामान्य से काफी अलग रेहता है । हर किसी को गर्म औषधी समान रूप से गुण नहीं देती है  । औषधियों की मात्रा व्यक्ति की उम्र, वातावरण, प्रकृति , स्त्री-पुरुष आदि factors को ध्यान मे रखते हुए निर्देशित की जाती है । Social Media पर कहे सारे नुस्खे सही ढंग से सूचित किए है या नहीं यह भी कभी जानने की कोशिश ही नहीं की है  । उनकी प्रामाणिकता जाने बिना ही लोगोने वे नुस्खे अपना लिए । कुछ लोगो ने  तो मानो की पेट मे आगा ही लगा दी है । गर्म चिज़े इन्फ़ैकशन को काबू मे ला सकती है , लेकिन उनकी मात्रा हर एक के शरीर के हिसाब से अलग अलग होगी ना ! और फिर बिना परामर्श लिए उनको अपनाने से आए विपरीत परिणामो से परेशान होकर लोगो ने आयुर्वेद को कोसना चालू किया । इच्छित परिणाम नहीं मिलने की वजह से उनका आयुर्वेद के प्रति विश्वास डगमगाने लगा ।

गलत तरीके से औषधि लेने पर तकलीफ 


              सही कहूँ तो, लोगो को हजारो सालो से शाश्वत, सपूर्ण  विकसित और परिपूर्ण ऐसे आयुर्वेद विज्ञान पर भरोसा नहीं है । आयुर्वेद को अपनाने के पीछे उनकी श्र्द्धा और डर से कही आगे है उनका “blindly follow” करने की आदत ! आयुर्वेद का नाम आते ही आंखे बंद करके उन्हे लोग अपनाने लगते है । आजकल तो हर कोई तीसरा आदमी बिना किसी अनुभव लिए social media पर डॉक्टर बन बैठा है, वे आयदिन नए नए नुस्खे और उपचार आयुर्वेद के नाम पर लोगो पर थोप रहे हैं ।  लोगो को आयुर्वेद उपचारो से ठीक होना है , किन्तु उसके लिए  social media मे viral हो रहे आयुर्वेद के नुस्खे ही अपनाने है । आयुर्वेद के डॉक्टर को परामर्श की फीस ना देनी पड़े उसके चक्कर मे लोगो ने अपने आप दवाइयाँ लेना शुरू कर दिया है । उनको अपने स्वास्थ्य के लिए प्रकृति का परीक्षण करवाके आयुर्वेद के डॉक्टर से परामर्श लेकर आयुर्वेद की औषधी खाने मे interest नहीं है । आजकल तो कुछ रुग्ण ऐसे भी हैं की जो सिर्फ डॉक्टर से सलाह लेने लिए या किसी बीमारी के सुजाव के लिए फोन पर या whatsapp पर मेसेज से बात करते है, बस बाकी का काम तो अभी भी मेडिकल स्टोर से ही हो जाता है ।

              काफी मेडिकल स्टोर वालों ने भी मौके का फाइदा उठाकर आयुर्वेद दवाइयाँ लोगों को बेचे जा रहे हैं और उसकी मनचाहे dose भी अपने आप बता दे रहे है । औषधि अगर उसकी मात्रा से ली जाए तब ही तो अपना सही असर दिखाएगी । जो चीजों की आदत शरीर को इतने समय तक बिलकुल नहीं थी उनकी अचानक से बहोत सारी मात्रा शरीर मे जाएगी तो भी  शरीर उसको  कैसे adjust कर पाएगा । वो औषध चाहे कितनी भी अच्छी हो उसका प्रयोग धीरे धीरे समजदारी से – सलाह लेकर करना ही जरूरी है ।

Yoga


              वैसी ही बात योग- प्राणायाम और कसरत के बारे मे हुई है । योग यह आयुर्वेद का अभिन्न अंग है । आजकल तो टीवी पर / social media पर कितने सारे योगगुरु बन बैठे है और खुदकी भिन्न भिन्न योग की पद्धतियाँ बना कर chocolate की तरह बेच रहे है । और उनके शिष्य  भी उनसे अभिभूत होकर हजारो रुपए देकर उन्हे follow भी कर रहे हैं । वैसे योग तो एक विज्ञान है, उसकी पद्धति और मुख्य विचारधारा एक ही है, फिर उसकी अलग अलग पद्धतियाँ कैसे अस्तित्व मे आ गयी ये तो एक डिबेट का विषय रहेगा । लेकिन यह बात का मैं खुद साक्षी हूँ की, इतने समय तक सरल ढंग से किए जाने वाले योग क्रिया को बार बार गला फाड़ कर कहे जाने पर भी काफी रुग्ण ने योग प्राणायाम कतह ही नहीं अपनाए है । और अब अचानक उनका अतियोग होने लगा है । कोई भी कसरत या योग को करने से पहेले शूक्ष्म क्रिया करनी पड़ती है । कसरत और योग-प्राणायाम को अपनाने की एक सही विधि और नियम होते हैं ।  शरीर के स्नायु जो अभी तक कभी भी योग का “य” भी नहीं देखा है उन्हे अचानक से दिन के 1-2 घंटे कसरत करवाने से क्या नतीजा आयेगा ? वैसे भी सभी योग या प्राणायाम या कसरत सभी के लिए नहीं बने है । यहा तो हररोज कौन किस से ज्यादा संख्या मे योग कर पायेगा इसकी स्पर्धा हो रही है । लेकिन इसके नियमों को जाने बिना ही बेढंग योग या कसरत या प्राणायाम करने से उन्हे काफी परेशानियाँ भी दिख रहीं है । और नतीजो का दोष दिया जाता है पूरे system को !



              कई बार तो ऐसा भी हुआ है की जब इस तरह से गलत तरीके या गलत नुस्खों को ना अपनाने का अनुरोध हम आयुर्वेद डॉक्टर द्वरा किया गया तो लोगो ने उल्टा डॉक्टर को ही दोषित ठहराया है । और कहा की, शायद डॉक्टर ज्यादा महेंगी दवाई देना चाहते है इसलिए वो हमारे नुस्खों और औषधियों का विरोध कर रहे है ....!

              खुद की नासमजी के कारण अपनाए हुए नुस्खो से मिले विपरित  परिणाम से आयुर्वेद विज्ञान कतह ही खराब या बिन-असरदार नहीं हो जाता है । यह वो व्यक्ति की गैरजिम्मेदारी थी जिससे उसे हानी हुई है । इसमे पूरी system खराब नहीं होती है ये खास समज़े ।

Ayurveda Medcine


             आईए कुछ खास बातों का ध्यान रखें:


· हमेशा योग्य आयुर्वेद चिकित्सकों से सलाह लेनी चाहिए। अपनी  हररोज की समस्या के लिए उनसे सलाह लें।

· आयुर्वेद फिजिशियन आपका फैमिली फिजिशियन हो सकता है। आपकी छोटी मोटी दिक्कतों के लिए उनसे मशवरा लें।

· आयुर्वेद विशेषज्ञों की राय के बिना सोशल मीडिया के किसी भी उपाय का पालन न करें।

· आयुर्वेद डॉक्टरों  की सलाह और प्रेस्क्रिप्शन के बाद ही कोई दवा लेनी होगी।

· आयुर्वेद की दवाओं के साइड इफेक्ट्स होते हैं, अतः ख़ुद से जाकर मेडिकल स्टोर से दवाई लेकर स्व-चिकित्सा करना बंद करें।

· घरेलू उपचार आयुर्वेद का हिस्सा हैं, यह कुछ हद तक आपकी राहत दे सकता है लेकिन वे पूर्ण रूप से आयुर्वेद उपचार नहीं हैं। सम्पूर्ण आयुर्वेद चिकित्सा के लिए आयुर्वेद विशेषज्ञ से ही औषध ले।

· आपके शरीर की प्रकृति को जाने बिना किसी भी घरेलू उपचार का सेवन न करें।

· मेडिकल स्टोर्स से सीधे दवाइयाँ खरीदना आपको स्वास्थ्य संकट में डाल सकता है।

· योग और व्यायाम दैनिक दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिए। लेकिन प्रारंभिक चरण में, विशेषज्ञों की सलाह से ही इसे करना चाहिए।

· किसी भी योग आसन या एक्सर्साइज़ को उसके नियम और व्यक्ति की शरीर की आवश्यकता और प्रकृति के अनुसार किया जाना चाहिए।

· आयुर्वेद एक विशाल विज्ञान है। अगर किसी को मनोवांछित परिणाम नहीं मिला है तो उसका मतलब यह नहीं है कि संपूर्ण विज्ञान अच्छा नहीं है। एक दूसरी राय भी लेनी चाहिए।

· ऐसी कोई एक ही "जादुई जड़ी बूटी या उपाय" दुनिया में नहीं है। आयुर्वेद विशेषज्ञों की सलाह के बिना अत्यधिक खुराक में एक विशेष दवा का सेवन न करें।

              गहेने बनाए के लिए क्या आप लुहार के पास कभी गए हो ? गहेने बनाए के लिए तो हम सुनार के पास ही जाते हैं  ना ! फिर हमारे अमूल्य स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए ज्यों त्यों नुस्खे अपनकर क्यूँ गलत दिशा पकड़ रहे हैं ? सही दिशा का चयन करे, आप जरूर से अपनी मंज़िल को पाएंगे ।

              Master Stroke: If your doctor prescribe you medication without first asking about your diet, sleep – exercise routine, water consumption, whether you have any structural issue or stress in life,,,,Then you  haven’t got a doctor. What you have is drug dealer …!


To read this article in English pls visit :

https://www.thelitthings.com/2020/09/seek-advice-of-ayurveda-experts-for.html

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