Friday, January 8, 2021

चलिये, गुज़रे साल से कुछ सीखकर नए वर्ष मे बनाए स्वस्थ और बहेतर ज़िंदगी

 चलिये गुजरे साल से कुछ सीखकर नए वर्ष मे बनाए स्वस्थ और बहेतर ज़िंदगी

कवि रॉबर्ट बर्न्स ने कहा है की,

“The Best laid Plans of Mice and Men often go awry!” - याने की हम कितना भी अच्छे से हमारे प्लान बना ले, कुछ न कुछ गलत हो ही जाता है ।

गुज़रा हुआ साल हम सभी के लिए चुनौतियों से भरपूर रहा । प्रकृति के मूल तत्वों को हम मनचाहे जितना छेड़ लें, आखिर मे हम मनुष्यों को कुदरत के सामने घुटने टेकने ही पड़ते है । पिछेले साल कुदरत को भी लॉक-डाउन के कारण अकान्त मे रहेने का मौका मिला होगा । प्रदूषण कम हुआ, हवा – पानी शुद्ध बने और पहाड़े दूर से भी दिखाई देने लगे । हमे भी यह अहसास हुआ की हमारी मनमर्जी के आगे प्रकृति की संतुलन की स्थिति ज्यादा मायने रखती है ।

प्रकृति का संतुलन 

          हम मे से कई सारे कहेंगे की गुज़रा साल भूल ही जाए तो बहेतर है ! लेकिन मैं कहूँगा की गुजरे हुए दिनों से हमे जो सीख मिली है वो हम कभी न भूले तो बहेतर है । जिसे हम बुरा वक़्त कह रहे है वही सही मायने मे अच्छा शिक्षक भी है । भूतकाल मे कई सारी विपदा और कुदरती आफत हम पर आई थी ; कुछ समय तो ऐसा था मानो की मनुष्य का नामोनिशान मीट जाएगा । लेकिन उन विकट परिस्थितियों मे भी हमने उनका डटकर सामना किया और विकास और प्रगति के पथ पर चले ।  

          बुरे वक़्त की ठोकरें हमे सही दिशा का ज्ञान करवाते है । और मुश्किल हालत ही विकास की नयी दिशा खोलते है । कोरोना के कारण कई सारे बिजनेस और उद्योग पर काले बादल छा गए थे । तो यही कोरोना की वजह से कई सारे नए बिजनेस प्लान सफल हुए । सिनेमा बंद हे तो ओटीटी प्लैटफ़ार्म सफल हुए, रैस्टौरेंट बंद हुए तो फूड डेलीवरी का बिजनेस खुला, सेनेटाइजर और मास्क का नया बिजनेस भी कोरोना की वजह से स्टार्ट हुआ ।  मुश्किल समय के अनुभव ही हमारी आगे की प्रगति की नींव है - यह हकरत्मक बात ही हमे पिछले साल से सिखनी है ।

          हमे अब ये अच्छी तरह समज आ गया है की दरअसल हमारी जरूरते बहोत कम है और सब कुछ बटोर लेने की हमारी लालच बहोत ज्यादा है । क्यूंकी ये पूरे साल ने हमे कुछ एसी बातों का अहेसास करवाया जो हम सालों से नज़रअंदाज़ कर रहे थे । अब तक मन की शक्ति और शरीर स्वास्थ्य को हम अहेमीयत नहीं दे रहे थे लेकिन वही हमारे लिए सबसे बड़ी ताकत है ये इस समय मे हमको अच्छे से समज आया है  । किसी करीबीकी बीमारी हो, मृत्यु हो या आर्थिक विटंबना हो, गुजरे साल मे धीरज और संयम के साथ परिवार के साथ बिताये एक एक लम्हे ने हमे अहेसास करवाया की परिवार का असली मोल क्या है।

जीवन

          संकट से समाधान की तरफकी गति का नाम ही जीवन है । आनेवाला नया साल हमारे लिए अनगिनत संभावनाओ और अवसर लेकर हमे गले लगाने के लिए उत्सुक है । चलिये भूतकाल से कोई गीला न रखे और पिछले साल की आपदा से सीख लेकर उन्हे नए अवसर मे बदले । आइये आने वाले साल को और हमार जीवन को स्वस्थ और बहेतर बनानेकी कुछ बाते पर नजर डाले ।

·                   स्वछता में ही प्रभु का वास है :

-         सफाई का पाठ हम कोरोना से अच्छे से सीख पाये है । वैसे तो बचपन से ही हमे स्व्छ्ता के नियम समजाए जाते है । लेकिन सही तरीके से हाथ धोना तो हम यह कोरोना के दौरान ही सीखे हैं । सफाई हर एक मायने मे हमारे व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए बहोत ही जरूरी है यह साबित हुआ है ।

स्वच्छता 

-         महात्मा गांधीजीने कहा है,

when there is both inner and outer cleanliness, it approaches Godliness…!

-         सफाई व्यक्तिगत हो, समाज की हो,हमारे खान पान की हो या वातावरण की – स्वछता से ही हम बहेतर स्वास्थ्य पा सकते है  । सफाई की आदत ये नए साल मे भी बनाए रखें।

·                   धैर्य – संयम – मानवता और साथ रहने से होगी नैया पार :

-         कोरोना के समय मे हमे धैर्य और संयम के बोधपाठ सीखने मिले । सोशियल – डिस्टेन्स का संयम हो या मास्क पहनने का संयम, आखिरकार वही हमारी ताकत बने । जिसने भी संयम रखा उनको बहोत कम तकलीफ भुगतनी पड़ी ।

-         आज से एक साल पहेले कोरोना का कोई उपचार हमे पास नहीं था और आज उसकी वेक्सिन बाजार मे आ गई है । इससे पहेले इतिहास मे इतनी जल्दी कोई वेक्सिन तैयार ही नहीं हुए थी । हमारे वैज्ञानिको का धैर्य ही यहा काम लगा है ।

-         कहेते हैं मुश्किल परिस्थिति मे जो साथ न छोड़े वही अपना होता है । कोरोना के समय मे कई लोगो के असली चहेरे सामने आए । कुछ अपनोने गैर बनकर साथ छोड़ा तो कुछ परायों ने अपना बनकर साथ निभाया ! पुलिस फोर्स , डॉक्टर और आरोग्य स्टाफ ने साहसिक बनकर हमारा साथ न छोड़ा और सुपर हीरो – वोरियर बन गए ।

मानवता ही धर्म है 
-         कई लोगो ने चुपचाप हो सके उतनी मदद आसपास के लोगों को की। कई दानवीरो ने खाना-राशन दान किए , तो कई लोगो ने आर्थिक तौर से मदद से सहयोग दिया । आसपास के राशन और सब्जीवालों ने भी दुकाने खोलकर सबकी मदद की, यह समय मे लोकल – मार्केट और लोकल-बिजनेस कितना महत्वपूर्ण है ये समज मे आया ।

सही मायने में मानवता के दर्शन हमे हुए और समज आया की एक दूसरे के साथ और सहकार से ही हम खुदका और समाज का विकास कर सकते है । मानवता के मूल्य पर चलकर और एकदूसरे की मदद से ही जीवन सफल हो पाएगा  । आनेवाले साल मे यथाशक्ति सबकी मदद करे, प्यार और भाईचारा फैला कर मानव मूल्यो को उत्कर्षित करें ।

·                   रोगप्रतिकारक क्षमता बरकरार रखे:

-         अपर्याप्त इम्युनिटी के कारण कई लोगों की मौत कोरोना के संक्रमण से हुई । कई लोगों को  अस्पतालों मे भर्ती  होना पड़ा । एक सर्वे के अनुसार करीबन 80 प्रतिशत से ज्यादा लोगो ने इस समय के दौरान अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए प्रयास किए है । इम्युनिटी बढ़ाने के लिए आयुर्वेद उपचार ये दौर मे सफल हुए  । आयुर्वेद विज्ञान द्वारा शरीर बल को बढ़ाकर निरोगी रह सकते है ये पूरी दुनिया जान पायी है । हमारे रोग - प्रतिकारक बल को उच्चतम रखना कितना आवश्यक है ये हम अब समज पाये है 

इम्युनिटी

-         याद रहे की यह रोग प्रतिकारक बल सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक तौर पर भी होता है । जिसकी चर्चा मैंने पहेले के ब्लॉग मे भी की है । रोगप्रतीकारक बल को बढ़ाने के लिए आज ही आयुर्वेद विशेषज्ञ से मिलकर चर्चा करे । सर्वांगी जीवन विकास के लिए शरीर के उच्चतम बल इम्युनिटी को आने वाले समय मे भी बरकरार रखे ।

·                   स्वास्थ्य ही श्रेष्ठ धन है:

-         कोरोना के संक्रामण ने हमे नए सिरे से सिखाया की स्वास्थ्य का क्या महत्व है । कोरोना की वजह से कई लोगो ने अपने नजदीकी व्यक्ति को गवाया । कई लोग अस्पताल मे भर्ती हुए और स्वस्थ्य होने के लिए काफी खर्चा भी उठाया । अब जाकर समज मे आया की अस्पताल के बिल और जान से हाथ धोने से अच्छा है की स्वस्थ्य तंदूरस्त रहेने के प्रयोजन ढूँढे जाए ।

-         इसलिए काफी लोग यह समय मे अपने स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा जागरूक हुए । शायद पहेली बार लोगों ने भोजन में स्वाद नहीं बल्कि तंदूरस्ती और इम्युनिटी ढूँढने का प्रयत्न किया । पौष्टिक और आरोग्यप्रद खुराक को हमने ज्यादा महत्व दिया । हमे यह समजा की जीवन का आनंद लेने के लिए शारीरिक और मानसिक स्वरूप से तंदूरस्त रहेना जरूरी ही नहीं बल्कि अनिवार्य है । अपने स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार बने और तंदूरस्त रहेने के प्रयत्न नए साल मे भी करते रहे ।

·                   आयुर्वेद फॅमिली डॉक्टर:

-         COVID के रुग्ण की शीघ्रता से स्वस्थ करने मे आयुर्वेद विज्ञान की अहम भूमिका रही है । पिछले साल कोरोना से बचने के लिए रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाने हेतु आयुष डिपार्टमेंट ऑफ इंडिया के स्वास्थ्य सुजावों को भारत के लोगो ने अच्छे से स्वीकारा था । कई सारे लोग हमारे आयुर्वेद के उपचार द्वारा जल्दी से स्वस्थ भी हुए है। इस समय मे आयुर्वेद विज्ञान की महत्ता लोगों को सच मे समज आयी है ।

आयुर्वेद डॉक्टर 

-         आने वाले साल मे आपको सिर्फ फॅमिली डॉक्टर की जरूरत नहीं है, बल्कि आयुर्वेद विशेषज्ञ फेमिली-डॉक्टर की जरूरत है । एक ऐसा डिग्री धारक आयुर्वेद डॉक्टर जिसे आपकी अवम आपके परिवार के सदस्यो के स्वास्थ्य और प्रकृति के बारे मे सारी जानकारी हो । ताकि मुश्किल समय मे वो आपको बहेतर उपचार सिविधाए दे पाये ।

-         शुद्ध आयुर्वेद उपचार और आयुर्वेद डॉक्टर द्वारा दी गई हेल्थ – टिप्स से आप अपना स्वास्थ्य बरकरार रख सकते है । ये नए साल मे अपने फेमिली आयुर्वेद डॉक्टर को चुने और उनके साथ आपके स्वास्थ्य के बारे मे चर्चा करे ।

·                   तनाव मुक्त जीवनशैली ही स्वास्थ्य का आधार :

-         आप चाहे कितने ही शारीरिक पुष्ट हो लेकिन तनाव – चिंता – डर – गुस्सा आदि मानसिक विकार से ग्रसित हैं तो आप निश्चित ही रोगी है । कोरोना के समय में लोक – डाउन के दौरान कई लोग मानसिक स्वरूप से हताश – निराश और भयभीत हुए दिखे ।

-         बीमारी या विकट परिस्थिति से हम पहेले मानसिक तौर से निर्बल और कमजोर होते है । कई लोगो ने मानसिक संतुलन इतनी हद तक गवा दिया की उन्होने आत्महत्या कर ली । तो दूसरी और कई लोगो ने मानसिक संतुलन बना कर धैर्य और संजदारी से यह मुश्किल समय से अच्छे से उभर कर बाहर आए ।

-         लोक-डाउन के दौरान हमने घर पर बहोत सारा समय बिताया । पता चला की जिस मानसिक शांति के लिए हम बाहर भाग रहे थे वो तो मानसिक शांति घर पर ही सबके साथ रहने पर मौजूद मिली । लोक – डाउन मे मंदिर मे जाना बंद हो गया लेकिन हमे यह बात का अहेसास भी हुआ की अगर मन मे ईश्वर का वास हो तो घर ही एक मंदिर बन जाता है । 

तनाव मुक्त जीवन 

-         हमारे भावनात्मक आवेशों को काबू मे रखना हम सीखे । हमने पाया की खुशी हमारे भीतर ही है । और अंदरूनी खुशी से बढ़ाकर कोई भौतिक आनंद हमे सुख नहीं दे सकता है । 

-         आयुर्वेद विज्ञान मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को महत्व देता है । यह समय मे ये बात जरूर से समज आ गयी की मानसिक तंदूरस्ती ही हमे जीवन का सही आनंद दे सकती है । मानसिक स्वास्थ्य और संतुलन से ही हम कठोर और विकट परिस्थिति से लड़कर बाहर निकल सकते हैं।

-         आने वाले नए साल मे योग – प्राणायाम और जीवनशैली मे योगी बदलावो से अपनी मानसिक संतुलन बरकरार रखे । आप मानसिक स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद की औषधियाँ डॉक्टर की सलाह से ले सकती है । याद रहे आयुर्वेद की मानसिक स्वास्थ्य की औषधियों से साइड-एफेक्ट का कोई खतरा भी नहीं होता है । यह छोटे बच्चों से लेकर बड़े तक कोई भी आयुर्वेद डॉक्टर की सलाह से ले सकता है ।

·       हेल्थ पॉलिसी और आवश्यक बचत करे

-         स्वास्थ्य संकट के समय अगर आर्थिक संकट भी आ जाए तो हालत बदतर हो जाती है । इसलिए पहेलेते यही प्रयास हो की बीमार ही न हो । और अगर दुर्भाग्य वश बीमारी आ जाए या अस्पताल मे भर्ती होना पड़े तो हमारी बचत ही हमे तनाव से छुट दे सकती है । 

स्वास्थ्य बीमा 

- धन की बचत से बीमारी को तो नहीं हटा सकते है लेकिन बीमारी के खर्चों को जरूर ज़ेल सकते है । अगर कुछ धन राशि नियमित रूप से स्वास्थ्य बीमा पर खर्च की जाए तो भविष्य मे आने वाले बड़े खर्च से निजात पा सकते है । इसलिए आने वाले साल मे कुछ खर्च कम करके स्वास्थ्य बीमा के बारे मे भी सोचे । परिवार के लिए एमेर्जेंसी फ़ंड के लिए कुछ धन राशि बचा कर रखें ।

·                   परिवर्तन ही जीवन का नियम है:

-         कोरोना के दौर ने हमे सिखाया की वक़्त कभी भी बादल सकता है । दुनिया मे अनगिनत परिवर्तन होते ही रहेते है और हमे भी उसके अनुसार बदलना ही पड़ता है । चार्ल्स डार्विन के “Survival of Fittest” के नियम के अनुसार जो जीव पर्यावरण के बदलाव के अनुसार अनुकूलन साधेगा वही जीवित रह पाएगा । समय से बलवान कोई नहीं है । और समय के साथ खुद को बदलने की ताकत ही हमारा हथियार है ।

-         चलिये नए साल मे नए सिरे से नया जीवन जीने का प्रयत्न करे । सकारात्मक बनकर शांति और भाईचारे का विश्व को नया आयाम दे ।

Master Stroke:

Let this be the year that you open your arms, your heart and your soul wide to let love in. To let friendship in. To let people in. Let this ne the year that you put your happiness first and you experience, appreciate and breath life in all shades. Let this be your year. Just yours…!” –Ruby Dhal

 

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