Tuesday, December 29, 2020

हेमंत और शिशिर ऋतुचर्या Ayurveda Lifestyle Regime in Winter Season

शिशिर अवम हेमन्त ऋतुचर्या

Ayurveda Lifestyle Regime in Winter Season

शिशिर ऋतु 


              स्वस्थ रहेने के लिए आयुर्वेद के ग्रंथ - संहिताओ मे ऋतु अनुसार जीवनशैली के नियम बताए गए है ।            आयुर्वेद संहिताओ मे यह वर्णन मिलता है की, जो मनुष्य ऋतु के अनुसार अनुकूल आहार विहार अपनाता है और प्रतिकूल बातों से दूर रहता है उस के शरीर मे  सभी प्रकार के बल की वृद्धि होती है ।

              सूर्य और चंद्रमा की गतिविधी के अनुसार एक वर्ष को ऋतु अनुसार प्रमुखतः छः ऋतुओं मे बांटा गया है । ठंडी का मौसम समान्यतः हेमंत और शिशिर ऋतु मे अनुभव किया जाता है ।

हेमंत – शिशिर ऋतु के दौरान वातावरण :

          हेमंत ऋतु को हम ठंडी के आगमन की ऋतु या “Pre-Winter Phase” कह सकते है। दिवाली के पर्व के समय हेमंत ऋतु के आने के लक्षण वातावरण मे दिखने लगते है। भारतीय केलेण्डर के मुताबिक मागशीर्ष और पोष का महिना हेमंत ऋतु कहलाता है । याने की English calendar के अनुसार  नवंबर और दिसंबर का महिना यह हेमंत ऋतु का रहेगा ऐसा हम कह सकते है ।   यह समय दौरान सूर्य की गति दक्षिणायन की ओर होता है । यह समय दरम्यान रात्री की अवधि लंबी और दिन छोटे होते है । आयुर्वेद मे यह समय विसर्ग कल कहा जाता है । इस समय चंद्रमा का बल अधिक और सूर्य बल क्षीण रहेता है । रात के समय चंद्रमा से ओस भी बरसने लगती है । 

          भारत मे शिशिर ऋतु यह सबसे ठंडी ऋतु होती है । शिशिर ऋतु का समय काल जनवरी – फरवरी का या माह – फाल्गुन का महिना माना जाता है । इस समय के दौरान वायु रूखी हो जाती है, वातावरण मे सूखापन महसूस होता है ।  सूर्य की गती उतरायन की तरफ होती है । यह अग्नि गुण प्रधान ऋतु है । शिशिर ऋतु मे चन्द्र का बल कम होता जाता है और सूर्य का बल धीरे धीरे बढ़ता जाता है, जो की ग्रीष्म ऋतु के आने तक बहोत ही बढ़ जाता है । आयुर्वेद मे यह ऋतु समय को आदान कल कहा जाता है ।

          हेमंत और शिशिर ऋतु शरीर को बलवान बनाने के लिए मुख्यऋतु है । कहा जाता है अगर यह ऋतु मे शरीर की ताकत और रोग प्रतिकारक शक्ति सही ढंग से बना ली जाए तो आपका आनेवाला पूरा साल निरोगी और तंदूरस्त जाएगा ।

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ठंडी में भूख क्यूँ ज्यादा लगती है ?

          ठंडी की ऋतु के दौरान बाहरी ठंड की वजह से हमारे त्वचा के सूक्ष्म छिद्र संकुचित होकर बंद हो जाते है । इसलिए ही हमें पसीना भी कम होता है । यह त्वचा के छिद्र बंद हो जाने के कारण शरीर की अंदरूनी गर्मी त्वचाके माध्यम से आहार नहीं निकाल पाती है । यह एक शरीर का कुदरती तौर से शरीर को गरम रखने का mechanism है । शरीर की ऊष्मा जो बाहर नहीं नीकल पाती, उससे शरीर के तापमान का नियंत्रण होता है । शीत काल मे स्वाभाविक रूप से ही मनुष्य को बल प्राप्त होता है । बलवान व्यक्ति  और ठंडी की वजह से शारीर मे उत्पन्न हुए वायु के कारण जठर में स्थित हमारी पाचक अग्नि प्रबल तरीके से प्रज्वलित हो जाती है। इसी कारण से शरीर खुराक को आसानी से पचाने में सक्षम हो जाता है । इसलिए ज्यादा भूख लगती रहती है । अगर इस भभकती अग्नि को आहार रूपी ईंधन कम पड़े तो यह अग्नि शरीर की धातुओं को भी जला कर नाश कर ससक्ति है । इसीलिए इस ऋतु मे पचने में भारी – पौष्टिक और शक्ति वर्धक व्यंजन का सेवन हितकारी कहा गया है ।

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हेमंत और शिरीर ऋतुचर्या :

          आइये अब हम ये देखें की हेमंत और शिशिर याने की ठंडी की यह ऋतु के दौरान आहार और विहार  मे कौनसी बातों का ध्यान रखना हमारे लिए हितकारक होगा।

हेमंत और शिशिर ऋतु मे आहार :

- यह ऋतु के दौरान राते लंबी और दिन छोटे होते है , अतः सुबह उठकर पौष्टिक और शक्तिवर्धक खुराक लेना जरूरी है । अगर ठीक तरह से खुराक न ली जाए तो शरीर मे संचित ऊष्मा की वजह से शरीर की धातुओ पर  विपरीत परिणाम आ सकता है और वायु दोष की दुष्टि हो सकती है ।

- यह ऋतु मे पीने के पानी को गरम कर के पीना चाहिए । ठंडे पानी से जठर की पाचक अग्नि मंद हो सकती है । सौंठ या तुलसी युक्त पानी का सेवन कारण स्वास्थ्यप्रद रहेगा ।

- यह ऋतु मे उपवास नहीं करना चाहिए । देर तक भूखे भी नहीं रहना चाहिए ।

- मधुर और खट्टे स्वाद के, स्वादिष्ट और पौष्टिक खुराक ज्यादा लेनी चाहिए । सूखे, बासी, कडवे और कसैले स्वाद के खुराक नहीं लेने चाहिए ।

- तीखे और कडवे गुण के खाद्य पदार्थ यह ऋतु मे नहीं लेने चाहिए।

- खजूर, आंवला, गन्ना, केला, अमरूद, नारियल आदि फल जरूर से लें। ये मौसम मेन आंवले ताजा और अच्छे मिलते है ।  आवले का मुरब्बा, च्यवनप्राश या किसी भी तरीके से आंवले का सेवन अति उत्तम माना गया है ।

इस समय के दौरान गाजर, पुदीना, पालक, बैंगन, मटर, फूलगोबी और ताजी हरी सब्जियाँ भरपूर मात्रा मे खाएं । ताजी सब्जियां और गरम मसालो से युक्त सूप भी बनाकर लेना स्फूर्ति दायक और स्वास्थ्यप्रद साबित होगा ।

- खुराक पकाने मे सौंठ, काली मिर्च, लहसून, ताजी हल्दी, अदरक, मेथी, पुदीना, नींबू और गरम मसालों का उपयोग जरूर से करना चाहिए ।

- गाय का घी, गौंद, और गुड से बने पौष्टिक लड्डू, तिल – मूँगफली के लड्डू – चिक्की  आदि व्यंजन शरीर को ऊर्जा देने मे सहायक होंगे ।

- दूध, दूध की मलाई, घी, रबड़ी, मक्खन, मिश्री, शहद, पंचामृत आदि नियमित तौर से सेवन करे ।

- मूँगफली, तिल, बादाम, अखरोट, अंजीर, जरदालू, मुनक्का, केसर का सेवन शरीर के हितकारक है ।

- गेहूं, बाजरा, उड़द दाल, चावल , चने, मकके से बने व्यंजन लेने चाहिए ।

- जो लोग मांसाहार करते है वे यह ऋतु मे पाचन शक्ति के अनुसार ले सकते है ।

 शिशिर ऋतु मे मद्यपान कम मात्र मे करने के लिए कहा है । यह नशा करने के लिए नहीं होता है । मदिरा की मात्रा कम और सही विधि से लेने का आयुर्वेद मे कहा गया है ।

शिशिर ऋतुचर्या


हेमंत और शिशिर ऋतु मे विहार :

- इन ऋतु के दौरान शरीर मे वायु दोष की मात्र बढ़ती है , और कफ दोष की संचिति होती है ।

- इस ऋतु मे शरीर को बलवान और सुखी त्वचा को कांतिमय बनाए के लिए तेल की मालिश हररोज करनी चाहिए । मालिश करते वक़्त तिल के तेल को हल्का गरम कर के लेना चाहिए । तेल को गरम करने से वो त्वचा मे आसानी से प्रवेश कर सकता है ।

- मालिश करने के लिए तिल का, जैतून का या सरसों के तेल का उपयोग करना चाहिए ।

- जैसे सुखी लकड़ी पर तेल लगाकर उसे मजबूत किया जा सकता है वैसे ही हमारे सूखे शरीर पर तेल की मालिश करने से शरीर बलवान बन जाता है ऐसा विधान आयुर्वेद संहिताओ मे मिलता है ।

- तेल मालिश के बाद स्टीम बाथ ले सकते है । साथ ही व्यायाम और कसरत करें ।

- विविध कसरत करना , दंड – बैठक करना, लंबी सैर, दौड़ना, साइकल चलाना, कबड्डी – कुश्ती – क्रिकेट – टेनिस जैसे विविद प्रकार के खेल खेलना यह मौसम मे स्वास्थ्य प्रद होता है ।

- सूर्य नमस्कार, विविध योगासन और प्राणायाम का अभ्यास करना  शरीर के हितकारक होता है ।

- सूर्य स्नान , सूर्य नमसकर, धूप का सेवन करने से ठंडी दूर होगी और शरीर स्फूर्तिवान बनेगा।

- स्नान के लिए गुंगुने गरम पानी का उपयोग करे । बहोत ज्यादा गरम पनि सिर पर न डाले । ठंडी होने पर भी सुबह मे स्नान  करना शरीर की स्फूर्ति के लिए आवश्यक होता है ।

- ठंडी ज्यादा होने के कारण कई लोग सुबह जल्दी से नहीं उठते हैं । किन्तु ये गलत बात है । शरीर के अच्छे स्वास्थ्य के लिए सुबह जल्दी उठना जरूरी होता है । देर से उठने पर आलस निश्चित ही आपका पीछा नहीं छोड़ेगी ।

- यह ऋतु मे दिन मे ज्यादा नहीं सोना चाहिए ।

- अत्यधिक ठंड सहन करना, ठंडी हवा मे घूमना स्वास्थ्य के लिए हितकारी नहीं है ।

- ठंड से बचने के लिए गरम और ऊनी वस्त्र यह ऋतु मे पहेनने चाहिए । दिन मे ज्यादा खुल्ली हवा मे नहीं घूमना चाहिए । रात्री मे गरम कमरे मे सोना और अलाव तपना लाभदायी होता है ।

- घर मे अघरू या गुग्गुल का धूपन करना चाहिए । धूप को नाक से सूंघने पर श्वास वही नलिकाए कफ मुक्त होकर स्वस्थ रहेंगी ।

Master Stroke: 

"We cannot stop the winter or the summer from coming. We cannot stop the spring or the fall or make them other than they are. They are gifts from the universe that we cannot refuse. But we can choose what we will contribute to life when each arrives."– Gary Zukha 

To read this article in ENGLISH by DrJigar Gor, Pls Visit:

https://www.thelitthings.com/2020/12/hemant-and-shishir-ritucharya-ayurveda.html 

6 comments:

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